Narendra Singh, mountaineer,

डॉक्टर ऑफ मोटिवेशन नरेंद्र सिंह का सपना, सातों महाद्वीप की चोटियां फतह करना

Updated: Sep 29,2020,03:25 PM IST Bhaskar

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नई दिल्ली। हौसले बुलंद हों तो मंजिल मिल ही जाती है। मिलेनियम सिटी से 65 किलोमीटर दूर रेवाड़ी के डॉ. नरेंद्र सिंह ने अपने जुनून व परिश्रम से यह सिद्ध कर दिखाया है। 12 साल के संघर्ष में पर्वतारोही डॉ. नरेंद्र सिंह ने पांच महाद्वीपों  की चोटियां फतह की हैं। अदम्य इच्छाशक्ति के धनी नरेंद्र औरों के लिए रोल माडल हैं । यही वजह है  कि उन्हें पिछले वर्ष नरेंद्र को लॉस एंजिलिस डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट लॉस एंजिलिस( यूनाइटेड स्टेट्स) की तरफ से डॉक्टर ऑफ मोटिवेशन की उपाधि से नवाजा गया। इस उपलब्धि को हासिल करने वाले नरेंद्र के खाते में एक और खुशी आई, तेनजिंग नोर्गे नेशनल अवॉर्ड के रूप में।

मंजिल पाते-पाते चूकेे पर हिम्मत नहीं हारी

नरेंद्र ने बताया कि शुरू में दो बार माउंट एवरेस्ट पर जाते-जाते लौटना पड़ा है। लेकिन, हिम्मत नहीं हारी। फिर से अपने मंजिल की तैयारियों में जुट गए। पहली बार 2014 में कठिन चढ़ाई पार करते हुए माउंट एवरेस्ट फतह किया। इसके बाद से शुरू हुआ सफर बदस्तूर जारी है। वर्ष 2019 में दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकंकागुआ को फतह किया।

परिवार के सहयोग से मिली मंजिल:
नरेंद्र बताते हैं कि वर्ष 2014 से लेकर 2017 तक पिता उसके सपने को पूरा करने के लिए हर तरह से मदद करते रहे। उस समय आर्थिक मदद की जरूरत थी। कोई आगे नहीं आया। वर्ष 2017 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो को फतह किया, तो बधाई देने वालों से लेकर आर्थिक मदद करने वालों की कमी नहीं रही।

फौजी के घर में जन्म लिया:

नरेंद्र का जन्म 15 दिसंबर 1994 को देश के वीर सिपाही कृष्णचंद के घर में हुआ। उसके पिता आर्मी कृष्णचंद से रिटायर्ड होकर रेवाड़ी के कोसली के छोटे से नेहरूगढ़ में रह रहे हैं। उसकी मां रोशन देवी गृहिणी हैं। बड़ा भाई सतपाल कुमार हरियाणा पुलिस में है। जो उसकी हर मदद के लिए कर वक्त खड़े रहे। फौजी पिता के जोश देखकर नरेंद्र ने कुछ कर गुजरने की ठानी थी। पर्वतारोही नरेन्द्र ने 1 अगस्त 2017 को यूरोप की एलब्रूश, 15 अगस्त 2017 और 2018 को साउथ अफ्रीका की किलिमांजारो पर 11वां वर्ल्ड रिकार्ड बनाते हुए राष्ट्रीय गीत गाकर तिरंगा फहराया था। 

32 घंटो में 472 किमी साइकिल चलाई
नरेन्द्र ने गुरुग्राम से जयपुर तक 32 घंटो में 472 किलोमीटर साइकिल यात्रा कर स्वच्छता का संदेश दिया था। आर्मी जवान कृष्णचंद के बेटे का सपना दुनिया के सभी सात महाद्वीपो पर फतह कर वर्ल्ड रिकार्ड बुक में अमीट छाप छोड़ने का है। नरेन्द्र ने 2016 में भी माउंट एवरेस्ट फतह किया था। नरेन्द्र 14 अन्य पर्वत श्रृंख्लाओ पर आरोहण कर देश का नाम रोशन कर चुके हैं। अगला लक्ष्य दो महाद्वीप को फतह करने का है,  इसे लेकर तैयारियां शुरू कर दी है।

 

 

स्कूल से ही है जुनून, जम्मू कश्मीर की पहाड़ियों से की थी  शुरुआत
नरेंद्न में यह जुनून स्कूली पढ़ाई केे दौरान जगा।  12 साल की उम्र में ही नरेन्द्र ने जम्मू कश्मीर की पहाड़ियों पर चढ़कर अपने पर्वतारोहण की प्रारंभिक शुरूआत की थी। वर्ष 2008 से उन्होंने नियमित तौर से पर्वतारोहण का अभ्यास शुरू कर दिया था। उसके बाद महज 19 वर्ष की आयु में 6512 मीटर ऊंची भागीरथी-टू व 5612 मीटर ऊंची डीकेडी-टू के साथ कालिंदी पास व वासुकी ताल पास, लेह, गढ़वाल चोटी को फतह कर सबसे कम उम्र का पर्वतारोही बना। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए  उन्हें वर्ल्ड किंग का सम्मान मिला  है।

तेनजिंग नोर्गे नेशनल अवार्ड:
डॉ. नरेंद्र सिंह का चयन तेनजिंग नोर्गे नेशनल अवार्ड के लिए किया गया है। पर्वतारोहण में इनकी उपलब्धियों को देखते हुए चयन समिति ने चयन किया था। पर्वतारोहण के साहसिक खेल में भारत सरकार की तरफ से दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा अवॉर्ड है।

पर्वतारोहण के क्षेत्र में 18 विश्व रिकॉर्ड हैं :
20 मई 2016 को नेपाल के रास्ते माउंट एवरेस्ट फतह किया। अब तक 5 महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटियों को फतह किया है। जिसमें माउंट एवरेस्ट, किलिमंजारो को दो बार, एलब्रुस को ट्रैवल्स में, कोजास्को व ऑस्ट्रेलिया की 10 सबसे ऊंची चोटियों को फतह किया। दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकंकागुआ को फतेह किया है। अब तक पर्वतारोहण के क्षेत्र में 18 विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए हैं।

अब तक के सफर के कुछ  अहम पड़ाव

2008 में शुरू हुआ एवरेस्ट अभियान
2012 में पर्वतारोहण के बेसिक कोर्स किया
2013 में एडवांस कोर्स किया
2014 में एमओआई
2016 में पहला एवरेस्ट फतह किया
2017 में अफ्रीका किलिमंजारो फतह किया
2018 में सबसे तेज एवरेस्ट पर चढ़ने का रिकॉर्ड
2018 में आस्ट्रेलिया में सबसे ऊंची चोटी को फतेह किया
2019 में दक्षिण अमेरिका में एकंकागुआ चोटी को फतेह किया

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